आज कोई भी मनुष्य यह नहीं कह सकता कि मैं सुखी हूं या मुझे किसी भी प्रकार का दुख नहीं है चाहे वह शारीरिक हो या फिर मानसिक
परमात्मा कहते हैं "तन धर सुखिया कोई नहीं देख्या, जो देख्या सो दुखिया हो, उदय अस्त की बात करत है, मैंने सब का किया विवेका हो।।"
आज कोई भी मनुष्य यह नहीं कह सकता कि मैं सुखी हूं या मुझे किसी भी प्रकार का दुख नहीं है चाहे वह शारीरिक हो या फिर मानसिक
.... सच्चाई तो यह है कि परमात्मा कहते हैं कि मनुष्य शरीर धारी प्राणी ऐसा कोई भी मैंने नहीं देखा जो दुखी नहीं हो... फिर भी प्राणी स्वयं को सर्वे सर्वा मान बैठा है... और इस अभिमान में उसने परमेश्वर के अस्तित्व को भी नकार दिया है.... आज विज्ञान और अनुसंधान का दम भरने वाले मनुष्य की बोलती क्यों बंद है जब एक छोटे से वायरस ने इसकी नाक में दम कर रखा है दुनिया भर के साइंटिस्ट इसके आगे हार चुके हैं... विश्व की नंबर वन मेडिकल फैसिलिटी वाले देश जैसे इटली और अमेरिका भी इसके सामने घुटने देख चुके हैं... व्यक्ति को एहसास हो चुका है मनुष्य अपने आपको सर्वे सर्वा मान पर बैठा है यह उसकी सबसे बड़ी भूल है... मनुष्य की तो औकात इतनी ही है कि अगर वह चल फिर रहा है और ठीक-ठाक है तो इतना घमंड में चूर रहता है कि मैं इतने बंगले बना दूंगा इतनी कार खरीद लूंगा इतनी फैक्ट्रियां लगा लूंगा मैं इतना पैसा इकट्ठा कर लूंगा... और अगर जरा सा कुछ हो जाए जैसे की अधरंग अर्थात लकवा मार जाए तो बंगले फैक्ट्री तो दूर की बात वह अपने रोजमर्रा के दैनिक कार्य भी खुद नहीं कर पाएगा दूसरों पर आश्रित हो जाएगा पड़े पड़े मुंह में मक्खियां घुसे और निकले पर वह उनको भी उड़ाने में असमर्थ हो जाएगा... बस इतनी सी औकात है इस तुच्छ मानव की... इसलिए मनुष्य को समय रहते संभल जाना चाहिए यह मनुष्य जीवन बहुत ही अनमोल है जो कि परमेश्वर ने इस प्राणी को सत भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करने हेतु प्रदान किया है... और यह मनुष्य व्यर्थ के कामों में अपना पूरा जीवन बर्बाद कर देता है और जिस काम को करना था उसकी शुरुआत ही नहीं करता.... अभी भी समय है मनुष्य जीवन रहते हुए सद्भक्ति कर ली जाए तो मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है... पर मनुष्य को पथभ्रष्ट करने वाले नकली आध्यात्मिक गुरु बहुत हो गए हैं... जो उसे सीधे नर्क में ले जाते हैं .. इसका हल भी भगवत गीता में बताया है कि पूर्ण गुरु अर्थात तत्वदर्शी संत की पहचान बताई है कि वह पूर्ण गुरु सभी शास्त्रों वेदों पुराणों कुरान बाइबल और सभी धर्मों के धर्म ग्रंथों का ज्ञाता होगा और सभी व्यक्तियों को समान दृष्टि से देखेगा अर्थात् किसी में भी ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं करेगा और केवल वही पूर्ण गुरु संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष को तत्व से जानता है... इस प्रकार के पूर्ण गुरु की खोज करके उनसे सद्भक्ति प्राप्त करके मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ना चाहिए.... नहीं तो धन इकट्ठा करने में कमाए हुए पाप और तेरी मेरी करने में ही यह जीवन निकल जाता है और फिर बहुत ही पछतावा होता है..... एक सच्ची और कड़वी बात यह है कि वर्तमान में वह पूर्ण गुरु अर्थात तत्वदर्शी संत इस पृथ्वी पर मौजूद है पर यह अज्ञानी मानव उन्हें पहचान नहीं पा रहा है... उनसे विज्ञान और अनुसंधान का दम भर के कुतर्क करता है.... पर वह परमेश्वर तो अपना कार्य करने आए हैं और अपना कार्य करके थोड़े दिनों में चले जाएंगे निंदा करने वाले उनकी निंदा करते रहेंगे और अपने पाप इकट्ठे करते रहेंगे... अब तय आपको करना है कि आप ऐसे पूर्ण संत की निंदा करके पाप कमाते हैं या फिर उन महापुरुष की शरण ग्रहण करके अपना मनुष्य जीवन का कल्याण करवाते हैं... उन महान संत का नाम जिनके बारे में कई भविष्य वक्ताओं ने भविष्यवाणियां की है और जिन्हें तारणहार कहा है उन महापुरुष का नाम जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं..... जी हां सच्चाई यही है आप आज मान लो या सर्वनाश होने के बाद मान लेना पर पूर्ण मोक्ष मार्ग तो यही है... अधिक जानकारी के लिए पढ़िए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तकें ज्ञान गंगा और जीने की राह.. अथवा देखिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे और ईश्वर टीवी पर रात 8:30 बजे और श्रद्धा चैनल पर दोपहर 2:00 बजे।।
www.jagatgururampalji.org
सत साहेब
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सत साहेब

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