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Showing posts from July, 2020

श्री विष्णु जी स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि मेरा (विष्णु का) श्री ब्रह्मा का तथा श्री शिव का आविर्भाव यानि जन्म तथा तिरोभाव यानि मरण होता है।

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श्री देवी महापुराण के तीसरे स्कंद के अध्याय 4.5 पृष्ठ 138 की सम्बन्धित प्रकरण की फोटोकॉपी यह फोटोकॉपी श्री देवी पुराण की है। इसमें श्री विष्णु जी स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि मेरा (विष्णु का) श्री ब्रह्मा का तथा श्री शिव का आविर्भाव यानि जन्म तथा तिरोभाव यानि मरण होता है। इसी फोटोकॉपी में यह भी प्रमाणित है कि इन तीनों को जन्म देने वाली भी देवी दुर्गा जी यानि अष्टांगी है। हिन्दू धर्म के अज्ञानी धर्मगुरू कहते हैं कि इनके कोई माता-पिता नहीं हैं। सइ प्रकार की अनेक मिथ्या कथाऐं शास्त्रों के विपरित बताकर इन अज्ञानियों ने हिन्दू समाज का बेड़ा गरक कर रखा है। हिन्दू धर्मगुरू कहते हैं कि श्री विष्णु जी सतगुण, श्री शिव जी तमगुण व अन्य देवी-देवताओं की पूजा करो जबकि गीता में अध्याय 7 श्लोक 12.15 तथा 20.23 में कहा है कि इनकी पूजा करने वाले राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच दूषित कर्म करने वाले मूर्ख हैं। हिन्दू धर्मगुरू श्री ब्रह्मा, श्री विष्णु तथा श्री शिव जी को ईश यानि सर्व के स्वामी बताते हैं जबकि श्री शिव महापुराण में विद्यवेश्वर संहिता भाग-1 पृष्ठ 17...

कोई उसे भगवान कहता है कोई उसे अल्लाह कहता है कोई उसे गॉड कहता है कोई उसे वाहेगुरु कहता है..

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मनुष्य पर जब भी कोई विपदा आती है और वह पूरी तरह से उस विपदा से निकलने में असमर्थ हो जाता है  तब  वह मनुष्य उस परमपिता को याद करता है कोई उसे भगवान कहता है कोई उसे अल्लाह कहता है कोई उसे गॉड कहता है कोई उसे वाहेगुरु कहता है.. .... व्यक्ति ने अपने जीवन काल में अपने समाज से और अपने परिवार से बड़े बुजुर्गों से जो भी कुछ सीखा है उस आधार पर वह भक्ति साधना करने का प्रयास करता है  अपने दुखों के निवारण हेतु..... कोई मंदिरों में  जाता है तो कोई दरगाह कोई गुरुद्वारों में जाता है तो कोई चर्च में... उस परम शक्ति की तलाश में जो उनके दुख निवारण कर सके... और यह सब वह अपने समाज और अपने से बड़ों की देखा देखी ही करता है..., समाज और बड़ों ने भी तो देखा देखी ही यह सब साधना शुरू की... पर क्या यह साधना यह भक्ति विधि सही है क्या मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च में जाने से भगवान की प्राप्ति हो सकती है... बुरा ना माने पर एक बात तो कहनी पड़ेगी भगवान कोई पशु तो नहीं है जिसे कोई मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे क्या चर्च में बांधकर रखें... वह तो सर्वत्र है जहां भी उसे आप अंतरात्मा से याद करो वह परमात्म...