कोई उसे भगवान कहता है कोई उसे अल्लाह कहता है कोई उसे गॉड कहता है कोई उसे वाहेगुरु कहता है..
मनुष्य पर जब भी कोई विपदा आती है और वह पूरी तरह से उस विपदा से निकलने में असमर्थ हो जाता है तब वह मनुष्य उस परमपिता को याद करता है कोई उसे भगवान कहता है कोई उसे अल्लाह कहता है कोई उसे गॉड कहता है कोई उसे वाहेगुरु कहता है..
.... व्यक्ति ने अपने जीवन काल में अपने समाज से और अपने परिवार से बड़े बुजुर्गों से जो भी कुछ सीखा है उस आधार पर वह भक्ति साधना करने का प्रयास करता है अपने दुखों के निवारण हेतु..... कोई मंदिरों में जाता है तो कोई दरगाह कोई गुरुद्वारों में जाता है तो कोई चर्च में... उस परम शक्ति की तलाश में जो उनके दुख निवारण कर सके... और यह सब वह अपने समाज और अपने से बड़ों की देखा देखी ही करता है..., समाज और बड़ों ने भी तो देखा देखी ही यह सब साधना शुरू की... पर क्या यह साधना यह भक्ति विधि सही है क्या मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च में जाने से भगवान की प्राप्ति हो सकती है... बुरा ना माने पर एक बात तो कहनी पड़ेगी भगवान कोई पशु तो नहीं है जिसे कोई मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे क्या चर्च में बांधकर रखें... वह तो सर्वत्र है जहां भी उसे आप अंतरात्मा से याद करो वह परमात्मा सर्वत्र मौजूद है.... पर हां इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता कि दुखों का पहाड़ तो सभी व्यक्तियों पर टूटा पड़ा है क्योंकि इस दुनिया में जिसने जन्म लिया है वह सुखी हो यह सवाल ही नहीं उठता चाहे वह अमीर हो चाहे वह गरीब.... किसी को शारीरिक कष्ट है तो किसी को मानसिक कोई निर्धन है तो कोई अधिक माया होने से उसकी चिंता में ही डूबा रहता है... किसी को परिवारिक कष्ट है तो कोई लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है... तो ऐसे में तो वह व्यक्ति जो कष्ट दुखों के पहाड़ से घिरे हैं परमात्मा को अंतरात्मा से याद तो करते ही हैं तो फिर आखिर परमात्मा उनकी मदद करते क्यों नहीं..... क्या परमात्मा का अस्तित्व है ही नहीं या फिर हम जिन्हें भगवान माने बैठे हैं वह भगवान है ही नहीं हमें गुमराह किया गया है....... जी हां आपने बिल्कुल सही सुना अगर आप सच्चाई अपनी आंखों से देखोगे तो आपके पांव तले से जमीन खिसक जाएगी..... आप हमारे सद ग्रंथ सभी धर्म ग्रंथों के सदग्रंथ चाहे वह श्रीमद्भगवद्गीता हो चाहे वेद हो चाहे कुरान शरीफ हो चाहे कुरान मजीद हो चाहे बाइबल हो चाहे फिर गुरु ग्रंथ साहिब हो आप किसी भी सदग्रंथ से मिलान करेंगे तो आप पाएंगे कि आप जो भक्ति विधि कर रहे हैं और जिन्हें भगवान माने बैठे हैं उनकी साधना के बारे में तो इन सद ग्रंथों में कहीं भी कुछ लिखा ही नहीं है...... तो फिर यह सब सद ग्रंथ आखिर परमात्मा बताते कैसे हैं वह सत्य परमात्मा कौन है जो वास्तव में पूजा के लायक है वह परमात्मा जो परमपिता परमेश्वर है हम सभी के पिता हैं जनक हैं जिनसे इस संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है जो हमारे माता-पिता हैं जो परमात्मा आदि अनंत काल से मौजूद है जो शाश्वत है जो ना कभी जन्मता है और ना ही कभी मरता है.... और जिस परमेश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेकों महात्माओं ने अपने शरीर को गला दिया वह पूर्ण परमात्मा जहां जाने के बाद प्राणी पुनः संसार में लौटकर नहीं आता है और पूर्ण मोक्ष को प्राप्त कर जाता है उस परमात्मा के बारे में हमारे सभी सद ग्रंथों में भक्ति साधना करने को कहा है.... और वेद इस बात की गवाही देते हैं कि वह परमात्मा साकार है और नर आकार है मनुष्य सदृश्य है और जो द्युलोक के तीसरे पृष्ठ पर अर्थात सतलोक में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान हैं और वह प्रत्येक युग में एक कमल के पुष्प पर शिशु रूप में आकर विराजमान होते हैं और वहां से उन्हें निसंतान दंपत्ति ले जाते हैं और उनकी उत्पत्ति कुंवारी गायों के दूध से होती है और वह जब तक इस मृत्युलोक में लीला करके जाते हैं अपना सत्य ज्ञान लोगों को दोहों के माध्यम से सुनाते हैं इससे लोग उन्हें कवि की उपाधि देते हैं... जो उनके ज्ञान को स्वीकार करता है वे उसे सद्भक्ति देकर सतलोक ले जाते हैं और पूर्ण मोक्ष करवाते हैं..... वह पूर्ण परमात्मा जो वास्तव में सत्य परमात्मा है वह परमेश्वर जिनको वेदों में कर्विदेव कहा है और कुरान शरीफ में अल्लाह हू अकबर कहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में जिसे वाहेगुरु कहा है बाइबल जैसे गॉड कहती है... वह परमात्मा आज से 600 वर्ष पहले काशी में 1 जुलाहे की भूमिका अदा करके गये हैं और अनेकों लोगों को सद्भक्ति बताई.... वह परमात्मा जिसे केवल एक कवि कह कर नजरअंदाज कर दिया गया वह कबीर दास पूर्ण परमात्मा स्वयं कबीर साहेब आए थे.... वही सत्य परमात्मा है.... और सद ग्रंथों के अनुसार भगवत गीता तो यह बताती है कि उस परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उस तत्वदर्शी संत की खोज करनी चाहिए और कुरान शरीफ कहती है कि उस अल्लाह के बारे में उस बाखबर से जाकर पूछ और गुरु ग्रंथ साहिब जिसे वाहेगुरु कहती है.... भगवत गीता में उस तत्वदर्शी संत की पहचान भी बताई है की वह तत्वदर्शी संत संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष को तत्व से जानता है और वह सभी सद ग्रंथों चार वेद छह शास्त्र 18 पुराण और कुरान बाइबल गुरु ग्रंथ साहिब का भी ज्ञाता होगा और वह सभी को समान दृष्टि से देखेगा अर्थात किसी में भी ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं करेगा और वह स्वयं भी सद्भक्ति करेगा और अपने अनुयायियों से भी करवाएगा वह तत्वदर्शी संत ही एकमात्र ऐसा संत होगा जो शास्त्रानुसार सद्भक्ति करवायेगा.... वर्तमान में इस संपूर्ण पृथ्वी पर केवल एक मात्र ही ऐसा संत हैं जो शास्त्रों के अनुसार सद्भक्ति विधि बताते हैं उनका नाम है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज... पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी से जल्द से जल्द नाम उपदेश लेकर अपना कल्याण करवाइए... अधिक जानकारी के लिए पढ़िए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तकें ज्ञान गंगा और जीने की राह अथवा देखिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे और श्रद्धा चैनल पर दोपहर 2:00 और ईश्वर टीवी पर रात 8:30 बजे और नेपाल वन चैनल पर प्रातः 6:00 बजे
www.jagatgururampalji.org
.... व्यक्ति ने अपने जीवन काल में अपने समाज से और अपने परिवार से बड़े बुजुर्गों से जो भी कुछ सीखा है उस आधार पर वह भक्ति साधना करने का प्रयास करता है अपने दुखों के निवारण हेतु..... कोई मंदिरों में जाता है तो कोई दरगाह कोई गुरुद्वारों में जाता है तो कोई चर्च में... उस परम शक्ति की तलाश में जो उनके दुख निवारण कर सके... और यह सब वह अपने समाज और अपने से बड़ों की देखा देखी ही करता है..., समाज और बड़ों ने भी तो देखा देखी ही यह सब साधना शुरू की... पर क्या यह साधना यह भक्ति विधि सही है क्या मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे चर्च में जाने से भगवान की प्राप्ति हो सकती है... बुरा ना माने पर एक बात तो कहनी पड़ेगी भगवान कोई पशु तो नहीं है जिसे कोई मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे क्या चर्च में बांधकर रखें... वह तो सर्वत्र है जहां भी उसे आप अंतरात्मा से याद करो वह परमात्मा सर्वत्र मौजूद है.... पर हां इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता कि दुखों का पहाड़ तो सभी व्यक्तियों पर टूटा पड़ा है क्योंकि इस दुनिया में जिसने जन्म लिया है वह सुखी हो यह सवाल ही नहीं उठता चाहे वह अमीर हो चाहे वह गरीब.... किसी को शारीरिक कष्ट है तो किसी को मानसिक कोई निर्धन है तो कोई अधिक माया होने से उसकी चिंता में ही डूबा रहता है... किसी को परिवारिक कष्ट है तो कोई लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है... तो ऐसे में तो वह व्यक्ति जो कष्ट दुखों के पहाड़ से घिरे हैं परमात्मा को अंतरात्मा से याद तो करते ही हैं तो फिर आखिर परमात्मा उनकी मदद करते क्यों नहीं..... क्या परमात्मा का अस्तित्व है ही नहीं या फिर हम जिन्हें भगवान माने बैठे हैं वह भगवान है ही नहीं हमें गुमराह किया गया है....... जी हां आपने बिल्कुल सही सुना अगर आप सच्चाई अपनी आंखों से देखोगे तो आपके पांव तले से जमीन खिसक जाएगी..... आप हमारे सद ग्रंथ सभी धर्म ग्रंथों के सदग्रंथ चाहे वह श्रीमद्भगवद्गीता हो चाहे वेद हो चाहे कुरान शरीफ हो चाहे कुरान मजीद हो चाहे बाइबल हो चाहे फिर गुरु ग्रंथ साहिब हो आप किसी भी सदग्रंथ से मिलान करेंगे तो आप पाएंगे कि आप जो भक्ति विधि कर रहे हैं और जिन्हें भगवान माने बैठे हैं उनकी साधना के बारे में तो इन सद ग्रंथों में कहीं भी कुछ लिखा ही नहीं है...... तो फिर यह सब सद ग्रंथ आखिर परमात्मा बताते कैसे हैं वह सत्य परमात्मा कौन है जो वास्तव में पूजा के लायक है वह परमात्मा जो परमपिता परमेश्वर है हम सभी के पिता हैं जनक हैं जिनसे इस संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है जो हमारे माता-पिता हैं जो परमात्मा आदि अनंत काल से मौजूद है जो शाश्वत है जो ना कभी जन्मता है और ना ही कभी मरता है.... और जिस परमेश्वर को प्राप्त करने के लिए अनेकों महात्माओं ने अपने शरीर को गला दिया वह पूर्ण परमात्मा जहां जाने के बाद प्राणी पुनः संसार में लौटकर नहीं आता है और पूर्ण मोक्ष को प्राप्त कर जाता है उस परमात्मा के बारे में हमारे सभी सद ग्रंथों में भक्ति साधना करने को कहा है.... और वेद इस बात की गवाही देते हैं कि वह परमात्मा साकार है और नर आकार है मनुष्य सदृश्य है और जो द्युलोक के तीसरे पृष्ठ पर अर्थात सतलोक में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान हैं और वह प्रत्येक युग में एक कमल के पुष्प पर शिशु रूप में आकर विराजमान होते हैं और वहां से उन्हें निसंतान दंपत्ति ले जाते हैं और उनकी उत्पत्ति कुंवारी गायों के दूध से होती है और वह जब तक इस मृत्युलोक में लीला करके जाते हैं अपना सत्य ज्ञान लोगों को दोहों के माध्यम से सुनाते हैं इससे लोग उन्हें कवि की उपाधि देते हैं... जो उनके ज्ञान को स्वीकार करता है वे उसे सद्भक्ति देकर सतलोक ले जाते हैं और पूर्ण मोक्ष करवाते हैं..... वह पूर्ण परमात्मा जो वास्तव में सत्य परमात्मा है वह परमेश्वर जिनको वेदों में कर्विदेव कहा है और कुरान शरीफ में अल्लाह हू अकबर कहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में जिसे वाहेगुरु कहा है बाइबल जैसे गॉड कहती है... वह परमात्मा आज से 600 वर्ष पहले काशी में 1 जुलाहे की भूमिका अदा करके गये हैं और अनेकों लोगों को सद्भक्ति बताई.... वह परमात्मा जिसे केवल एक कवि कह कर नजरअंदाज कर दिया गया वह कबीर दास पूर्ण परमात्मा स्वयं कबीर साहेब आए थे.... वही सत्य परमात्मा है.... और सद ग्रंथों के अनुसार भगवत गीता तो यह बताती है कि उस परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उस तत्वदर्शी संत की खोज करनी चाहिए और कुरान शरीफ कहती है कि उस अल्लाह के बारे में उस बाखबर से जाकर पूछ और गुरु ग्रंथ साहिब जिसे वाहेगुरु कहती है.... भगवत गीता में उस तत्वदर्शी संत की पहचान भी बताई है की वह तत्वदर्शी संत संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष को तत्व से जानता है और वह सभी सद ग्रंथों चार वेद छह शास्त्र 18 पुराण और कुरान बाइबल गुरु ग्रंथ साहिब का भी ज्ञाता होगा और वह सभी को समान दृष्टि से देखेगा अर्थात किसी में भी ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं करेगा और वह स्वयं भी सद्भक्ति करेगा और अपने अनुयायियों से भी करवाएगा वह तत्वदर्शी संत ही एकमात्र ऐसा संत होगा जो शास्त्रानुसार सद्भक्ति करवायेगा.... वर्तमान में इस संपूर्ण पृथ्वी पर केवल एक मात्र ही ऐसा संत हैं जो शास्त्रों के अनुसार सद्भक्ति विधि बताते हैं उनका नाम है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज... पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी से जल्द से जल्द नाम उपदेश लेकर अपना कल्याण करवाइए... अधिक जानकारी के लिए पढ़िए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तकें ज्ञान गंगा और जीने की राह अथवा देखिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे और श्रद्धा चैनल पर दोपहर 2:00 और ईश्वर टीवी पर रात 8:30 बजे और नेपाल वन चैनल पर प्रातः 6:00 बजे
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