मानव का उत्थान
वर्तमान समय में मानव सभ्यता का लगभग पतन हो चुका है भाई भाई को देखकर राजी नहीं है भाई बहन को देखकर राजी नहीं है और प्रत्येक व्यक्ति यह सोचता है कि मैं सामने वाले को जितना लूट सकता हूं लूट लो... झूठ का बोलबाला है... पाखंड पूजा चरम पर है... भक्ति मार्ग को झूठे गुरुओं ने पैसे कमाने का तरीका बना लिया है... ऐसे में आखिर मानव सभ्यता का उत्थान हो तो कैसे हो... एक बात तो साफ है जब तक लोग परमात्मा से डरने वाले नहीं होंगे तब तक मानव सभ्यता का उत्थान संभव नहीं है.. पर आखिरकार परमात्मा से लोग डरेंगे कब जब वह परमात्मा को पहचानेंगे कि परमात्मा आखिर है कौन और परमात्मा का संविधान क्या है.... परमात्मा के संविधान में बीड़ी शराब मांस तंबाकू मदिरा हुक्का और दहेज प्रथा और झूठा दिखावा करने में फिजूल खर्च करना, मृत्यु भोज, शास्त्र विरुद्ध साधना करना अर्थात मनमाने ढंग से जोकि शास्त्रों में वर्णित है ही नहीं वह भक्ति करना, भूत पूजा करना, देवी देवताओं की पूजा करना आदि आदि सब कुछ वर्जित है अर्थात परमात्मा इसे सिरे से नकारते हैं... परमात्मा तो कोई और है भगवत गीता में जिसे उत्तम पुरुष कहां है वेद जिसकी महिम...