भारत का खराब शिक्षा स्तर

 आज जब लगभग संपूर्ण भारत साक्षर हो चुका है और  सरकार डिजिटल एजुकेशन सिस्टम पर जोर दे रही है तो क्या अब हम यह कह सकते हैं की हमारी शिक्षा का स्तर संतोषजनक है???  आप ही बताइए क्या लगता है???
क्या विद्यार्थी परीक्षा में अंक लाने के लिए पढ़ें तो उसे शिक्षा कहेंगे..??   जी हां यही है हमारे भारत का शिक्षा स्तर जहां  विद्यार्थी केवल परीक्षा में अंक लाने के लिए ही अध्ययन करते हैं... पर क्या इससे विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास हो पाएगा क्या विद्यार्थी को  ऐसे सिस्टम से सामाजिक राजनीतिक आर्थिक धार्मिक और विज्ञान का प्रायोगिक ज्ञान हो पाएगा..??
 जी नहीं ऐसा हो ही नहीं सकता.. और अगर सरकार शिक्षा का डिजिटलाइजेशन करके शिक्षा स्तर को ऊंचा करने का दम भर्ती हो तो यह उनकी गलतफहमी है... दरअसल आजकल शिक्षक को विद्यार्थी को पढ़ाने का उतना समय मिल ही नहीं पाता है क्योंकि अध्यापक जी को बच्चों की उपस्थिति और कार्यालय  संबंधित कार्य और बाल सभा और विद्यालय में होने वाली प्रत्येक गतिविधि यहां तक कि विद्यालय में कितनी दरिया हैं कितनी कुर्सियां हैं पोषाहार कितना आया.. बिजली का बिल कितना आया यह सब प्रविष्ठियां प्रतिदिन सरकार को ऑनलाइन  भेजनी होती है... आखिरकार समझ नहीं आता इन्होंने शिक्षकों को समझ क्या रखा है शिक्षक का अर्थ ही भूल गए लोग शिक्षक का अर्थ अध्यापन का कार्य है सिर्फ और इसके अलावा उस पर कोई बोझ डालेंगे तो वह अपना सो प्रतिशत विद्यार्थी को शिक्षित करने में नहीं लगा पाएगा जैसा कि पहले होता था शिक्षक का कार्य से पढ़ाने का ही होता था... क्या वर्तमान सिस्टम जिसमें सभी शिक्षक ऑनलाइन प्रविष्टियां करने में व्यस्त दिखाई देते हैं इसे लागू करने वाले महानुभावों में जरा भी अक्ल नहीं थी या सरकार पैसे बचाने के चक्कर में इन मासूम शिक्षकों का शोषण करने में ज्यादा रुचि रखती है... यह तो स्वाभाविक सी बात है कि शिक्षा का कार्य केवल अध्यापन का है सो उसे केवल विद्यार्थी को शिक्षित करने का कार्य सोपें... और एक या एक से अधिक पोस्ट  पर ऐसे ईमित्र वालों  की भर्ती करें जो लोग यह ऑनलाइन का काम करें जिससे कि शिक्षकों को अपना अध्यापन का कार्य छोड़कर यहां वहां भटकना नहीं पड़े और वे अपना सारा ध्यान विद्यार्थियों को शिक्षित करने में लगाएं

 खैर हम तो शिक्षा के स्तर की बात कर रहे थे... पर यह बातें भी बताना जरूरी था क्योंकि जहां शिक्षा के स्तर को और सुधारना चाहिए वहां सरकार उन शिक्षकों को ही अपने मुख्य उद्देश्य से भटका रही है

चलिए मुख्य बिंदु पर आते हैं आखिर भारत में शिक्षा का स्तर सुधारा कैसे जाए.. क्या अंतर है हमारी देश की शिक्षा में और विकसित राष्ट्रों के शिक्षा तंत्र में... क्या आपको पता है विकसित राष्ट्रों में  विद्यार्थी कैसे अध्ययन करते हैं... वहां विद्यार्थी परीक्षा में अंकों के लिए नहीं पड़ते हैं बल्कि  काबिल और बेहतर  बनने के लिए पढ़ते हैं... और वह होता कैसे हैं.. ऐसे होता है कि वहां के विद्यार्थियों को शिक्षक जिस विषय पर अध्यापन कराया जाना है वह निश्चित दिन से पहले ही विद्यार्थियों को बता दिया जाता है... फिर विद्यार्थी उसे स्वयं पढ़ कर आते हैं उसके बारे में सब कुछ किसी भी पाठ्य पुस्तक से या इंटरनेट से सब कुछ सर्च करके आते हैं... फिर उसके बाद जिस दिन उस विषय पर कक्षा लगनी है उस दिन शिक्षक का कार्य क्या होता है... फिर शिक्षक विद्यार्थियों से पूछता है कि बताइए आपको इस विषय में क्या परेशानी आ रही है और क्या क्या आपको पूछना है... सबकी परेशानियां सुनने के बाद वह एक-एक करके सभी विद्यार्थियों की परेशानी दूर करने का प्रयत्न करते हैं... और विद्यार्थी उसमें बहुत ही रूचि लेकर पढ़ता है  क्योंकि उसने उस विषय पर गहन अध्ययन पहले ही कर लिया है तो उसे सब कुछ समझ भी आता है और फिर इसके बाद शिक्षक का एक और कार्य होता है... वे विद्यार्थियों को प्रायोगिक कार्य भी देते हैं जैसे वह उन्हें या तो कोई   निश्चित क्षेत्र में सर्वे करने का कार्य देते हैं या फिर जैसे कोई बिजनेस मैनेजमेंट के लिए स्नातक कर रहा है तो उसे छोटे-छोटे टास्क देते हैं बिजनेस स्टार्टअप करने का या फिर जैसे कोई चिकित्सा के क्षेत्र में स्नातक कर रहा है तो उसे किसी भी क्षेत्र में भेजकर वहां के लोगों के लक्षण और बीमारी के कारण आदि के बारे में सर्वे करने का टास्क देते हैं आदि आदि इस प्रकार विद्यार्थी स्वयं रुचि लेकर थ्योरी तो पढ़ ही रहा है और साथ ही प्रैक्टिकल भी कर रहा है तो वह बेहतर और योग्य क्यों नहीं बनेगा और यदि उसका लिखित मूल्यांकन भी किया जाए तो वह उसमें आसानी से उत्तीर्ण होना ही होना है.... यह होना चाहिए शिक्षा तंत्र हमारा ताकि हमारे देश के बच्चे डिग्रियां लेकर घर नहीं बैठे वह आत्मनिर्भर बन सके और पढ़े-लिखे बेरोजगारों की संख्या कम हो सके....

 साथ ही हमारे देश के विद्यार्थियों के लिए भटकाव भी बहुत हैं जैसे टीवी फिल्में इंटरनेट क्रिकेट और  भी  कई दुर व्यसन जैसे बीड़ी शराब मांस तमाकू हुक्का और किसी भी प्रकार का नशा और न जाने क्या-क्या ही चीजें आ गई है आजकल जो विद्यार्थियों को उनके मकसद से भटका कर उनकी पढ़ाई लिखाई की उम्र में उनकी पढ़ाई में रुचि समाप्त कर देती है... इसके लिए अति आवश्यक है कि उन्हें सत्संग अर्थात  पूर्ण संत का ज्ञान सुनाया जाए क्योंकि सत्संग में आने से व्यक्ति के सभी विकार समाप्त होते हैं और वह इस बात से अवगत होता है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं.... वर्तमान में भारत देश में एक बहुत ही अनमोल ज्ञान देने वाले पूर्ण संत हैं जिनका ज्ञान सुनकर और उनसे नाम उपदेश लेकर कई लोगों ने भयंकर से भयंकर नशे किसी भी प्रकार के दुर व्यसन और सभी प्रकार की बुराइयों को त्याग दिया... और एक साफ-सुथरा और निर्मल जीवन जिया और परमात्मा का उपदेश लेकर भक्ति की और साथ ही अच्छी शिक्षा भी प्राप्त की... उन संत का नाम है जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज... इन संत जी के मंगल प्रवचन  साधना चैनल पर प्रतिदिन भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे और श्रद्धा चैनल पर प्रतिदिन भारतीय समयानुसार दोपहर 2:00 बजे प्रसारित होते हैं आप लोग स्वयं भी देखिए और अपने बच्चों को भी दिखाइए मेरा दावा है कि संत रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन जिन भी लोगों ने देखे हैं और उन से नाम उपदेश लेकर मर्यादा में रहते हुए भक्ति की है  उन्हें सभी प्रकार के दुरव्यसनों से मुक्ति प्राप्त हुई है.. और उन्होंने सभी बुराइयां त्यागकर सद्भक्ति भी की और अच्छी शिक्षा भी प्राप्त की है.. संत रामपाल जी महाराज के बारे में अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई वेबसाइट पर विजिट कीजिए यहां से आप उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें जैसे जीने की राह और ज्ञान गंगा आदि आदि पुस्तकें विभिन्न भाषाओं में डाउनलोड कर सकते हैं और संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन भी आप डाउनलोड करके सुन सकते हैं...
www.jagatgururampalji.org

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